भारतीयों के बारे में शहीद भगत सिंह को थी बड़ी गलतफहमी

आज ही के दिन साल 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी गई थी। फांसी चढ़ने से पहले भगत सिंह ने एक बात लिखी थी और उससे पता चलता है कि भारतीयों के बारे में उनका अंदाजा कितना गलत था। उन्हें गलतफहमी थी कि भारतीय एकजुट होकर अंग्रेजों के खिलाफ उठ खड़े होंगे। उस वक्त के भारतीयों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेरा ही, आज भी हम देश के प्रति ईमानदार नहीं हैं। सभी नहीं, मगर ज्यादातर लोग अपने हित के लिए देश हित को पीछे कर देते हैं। पहले पढ़ें, भगत सिंह ने क्या फांसी चढ़ने से पहले साथियो को भेजे खत में क्या लिखा था-

 

“साथियो स्वाभाविक है जीने की इच्छा मुझमें भी होनी चाहिए। मैं इसे छिपाना नहीं चाहता हूं, लेकिन मैं एक शर्त पर जिंदा रह सकता हूं कि कैद होकर या पाबंद होकर न रहूं। मेरा नाम हिन्दुस्तानी क्रांति का प्रतीक बन चुका है। क्रांतिकारी दलों के आदर्शों ने मुझे बहुत ऊंचा उठा दिया है, इतना ऊंचा कि जीवित रहने की स्थिति में मैं इससे ऊंचा नहीं हो सकता था।

मेरे हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ने की सूरत में देश की माताएं अपने बच्चों के भगत सिंह की उम्मीद करेंगी। इससे आजादी के लिए कुर्बानी देने वालों की तादाद इतनी बढ़ जाएगी कि क्रांति को रोकना नामुमकिन हो जाएगा। आजकल मुझे खुद पर बहुत गर्व है। अब तो बड़ी बेताबी से अंतिम परीक्षा का इंतजार है। कामना है कि यह और नजदीक हो जाए”

 

यानी भगत सिंह को उम्मीद थी कि उनकी शहादत से देशवासियों की सोई हुई आत्मा जागेगी और वे क्रांति के मार्ग पर चल पड़ेंगे। उन्हें लगता था कि इससे लोगों को प्रेरणा मिलेगी देश की आजादी के लिए उठ खड़े होने की। दरअसल उस दौर में ज्यादातर हिंदुस्तानी स्वतंत्रता की लड़ाई में कूदने से बचते थे। परिवार की जिम्मेदारियां या अन्य वजहें भी इसके पीछे हो सकती हैं मगर हकीकत यही है कि भगत सिंह के बाद कोई दूसरा भगत सिंह नहीं हुआ। भगत सिंह को लगता था कि क्रांति को रोकना नामुमकिन हो जाएगा। मगर हकीकत यह है कि भारतीय उस वक्त एक-दूसरे की जड़ें काटने में मशगूल रहे। कई साल लग गए हमें आजादी हासिल करने में। अगर भारतीयों में एकता होती तो कहां अंग्रेज हमारे ऊपर राज कर पाते। उन्होंने हमारी ही मदद से हमारे ऊपर राज किया था।

 

वह वक्त तो चला गया, मगर क्या हम अपने गांव, शहर, कस्बे के लिए कुछ अच्छा नहीं कर सकते? आरटीआई के जरिए या अन्य माध्यमों से गांव-पड़ोस या मोहल्ले में हो रही गलत बातों का विरोध नहीं कर सकते? यही देशसेवा होगी, ही शहीदों की शहादत का सच्चा सम्मान होगा। जय हिंद।

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